Leadership और Management में श्रीकृष्ण से क्या सीखा जा सकता है?
Leadership का अर्थ हमेशा सबसे आगे खड़े होकर आदेश देना नहीं होता।
एक effective leader कई बार स्वयं पीछे रहकर दूसरों को आगे बढ़ाता है। वह लोगों की क्षमता पहचानता है, सही समय पर सलाह देता है और केवल जरूरत पड़ने पर सीधे हस्तक्षेप करता है।
श्रीकृष्ण के चरित्र में leadership का यही अनोखा पक्ष दिखाई देता है।
उन्होंने हर समस्या स्वयं हल करने का प्रयास नहीं किया। कई परिस्थितियों में उन्होंने दूसरों को उनकी भूमिका निभाने दी और केवल दिशा प्रदान की।
आज की management language में इसे influence without direct control कहा जा सकता है।
यह leadership का एक शक्तिशाली रूप है।
एक manager यदि हर छोटी चीज स्वयं करने लगे तो team विकसित नहीं होती। लेकिन यदि वह सही लोगों को जिम्मेदारी दे, उन्हें समझाए और critical moment पर support करे, तो पूरी team मजबूत होती है।
श्रीकृष्ण की रणनीतिक सोच को आधुनिक संदर्भ में देखें तो कई concepts सामने आते हैं:
Leadership,
communication,
negotiation,
crisis management,
team alignment,
timing,
long-term vision.
इसका अर्थ यह नहीं कि महाभारत की हर घटना को सीधे corporate management manual बना दिया जाए। लेकिन उन घटनाओं से decision-making के बारे में सोचने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न अवश्य मिलते हैं।
एक अच्छा leader कब बोले?
कब सुने?
कब intervention करे?
कब किसी दूसरे व्यक्ति को नेतृत्व करने दे?
इन्हीं प्रश्नों के कारण श्रीकृष्ण की रणनीतिक सोच आज भी प्रासंगिक लगती है।
मेरी ebook में 68 घटनाओं को इसी प्रकार कथा के साथ रणनीतिक विश्लेषण और आज के जीवन की शिक्षा से जोड़ा गया है।
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